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अंता उपचुनाव की हार पर BJP में मचा घमासान, उठने लगा धुंआ, एक चिट्ठी ने उधेड़कर रख दी ‘चुनावी प्रबंधन’ की बखिया


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Rajasthan BJP Politics : अंता उपचुनाव में हुई बीजेपी की करारी हार को लेकर अब पार्टी में अंदरखाने घमासान मचने लग गया है. बड़े नेताओं की कमियां गिनाई जाने लगी है. हार के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा है. पार्टी में खींचतान चुनाव से पहले ही शुरू हो गई थी. इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर दिखा. पार्टी में चल रही यह खींचतान अब छबड़ा से सात बार विधायक चुने जा चुके प्रताप सिंह सिंघवी के पत्र से सामने आई है. जानें क्या लिखा है इस पत्र में.

प्रताप सिंह सिंघवी छबड़ा से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं.

जयपुर. अंता उपचुनाव में कांग्रेस ने गढ़ जीत लिया और वह जश्न में डूबी है. वहीं भाजपा के कुनबे में हार के बाद मंथन शुरू होने के साथ ही घमासान भी मचने लग गया है. अंता उपचुनाव में बीजेपी की हार की एक बड़ी वजह पार्टी की अंदरुनी खींचतान को भी माना जा रहा है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि पार्टी अंता उपचुनाव अपनी आपसी गुटबाजी के कारण हारी है. अब एक दूसरे की नुक्ताचीनी की जा रही है. कमियां और गलतियां गिनाई जा रही है. पहले बंद कमरों में होने वाली खुसरफुसर अब आरोपों तब्दील होने लगी है. अंदरुनी कलह का धुंआ बाहर आने लग गया है.

इसकी बानगी बारां जिले की ही छबड़ा सीट से विधायक प्रताप सिंह सिंघवी की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चुनाव पूर्व लिखे गए पत्र में देखी जा सकती है. छबड़ा के वरिष्ठ विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने यह पत्र वोटिंग से चार दिन पहले यानी 7 नवंबर को लिखा था. पहले यह पत्र बाहर नहीं आया था। लेकिन चुनाव में हार हो जाने के बाद यह अब सार्वजनिक हो गया है. इस पत्र में उन्होंने अपनी अनदेखी और पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान का जिक्र किया था.

विधायक प्रताप सिंह सिंघवी की ओर से पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखा गया पत्र.

मुझे उपेक्षा और अपमान का दंश झेलना पड़ रहा है
उन्होंने लिखा था कि छबड़ा विधानसभा सीट से मेरे पिता जनसंघ और बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते. साल 1977 में स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत के लिए उन्होंने इस सीट को खाली किया. इसी सीट से मुझे सात बार जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. पार्टी के लगातार विश्वास से ही मैं राजस्थान विधानसभा में दूसरा सबसे वरिष्ठ विधायक हूं. विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने इस लेटर में आगे लिखा है कि मैंने पार्टी की अनवरत सेवा की. लेकिन इतने समर्पण के बाद भी मेरे गृह जिले बारां जिले की अंता सीट पर हो रहे उपचुनाव में मुझे उपेक्षा और अपमान का दंश झेलना पड़ रहा है.

चुनाव समिति ने मुझसे कोई संपर्क किया
सिंघवी ने लिखा की लिखा कि अंता में प्रचार के लिए 17 अक्टूबर 2025 को 40 नेताओं की सूची जारी की गई. उसमें मुझे शामिल नहीं किया गया. जबकि मुझसे जूनियर बारां जिले के दो अन्य विधायकों का नाम इसमें शामिल हैं. इससे मेरा मन आहत हुआ. मैंने अपनी मनोदशा से बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को अवगत कराया था. लेकिन मेरी उपेक्षा का क्रम यहीं नहीं थमा. पार्टी की ओर से 24 अक्टूबर 2025 को उपचुनाव के लिए चुनाव समिति घोषित की गई. इसमें मेरा नाम सदस्य के तौर पर सातवें क्रम में शामिल किया गया. इस पर मुझे कोई असंतोष नहीं है. लेकिन समीति ने ना तो मुझसे कोई संपर्क किया और ना ही मुझे कोई जिम्मेदारी देना उचित समझा.

अपमानित करने की इंतहा हो गई…
विधायक सिंघवी का दर्द यहीं तक नहीं थमा और उन्होंने आगे लिखा कि मुझे अपमानित करने की इंतहा तो तब हो गई जब 6 नवंबर 2025 को अंता-मांगरोल में आयोजित सीएम भजनलाल शर्मा की विजय संकल्प यात्रा का विज्ञापन समाचार पत्रों में दिया गया. इसमें बारां जिले के पार्टी को दोनों विधायकों राधेश्याम बैरवा और ललित मीणा का फोटो प्रकाशित किया गया. लेकिन मेरा नाम तक नहीं दिया गया. बहरहाल अंता उपचुनाव तो हो गया. हाड़ौती संभाग को भाजपा का गढ़ माना जाता है. उसमें सेंध लगने से भाजपा को भारी नुकसान हुआ है. पार्टी आने वाले समय में इसकी भरपाई कर पाएगी या नहीं यह तो समय ही बताएगा

Sandeep Rathore

संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से News18 के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें

संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से News18 के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर… और पढ़ें

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