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Mohan Bhagwat News: गुवाहाटी में संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि भारत को अमेरिका‑चीन के स्वार्थ-आधारित विवादों में नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें दोनों देशों से काम भर का संबंध रखना है. भागवत ने जोर दिया कि यदि कोई भी देश भारत के हितों के खिलाफ कदम उठाए तो प्रतिकार जरूरी है और क्षेत्र में संतुलन कायम रखने की क्षमता भारत के पास ही है.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गुवाहाटी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिन्दू राष्ट्र को लेकर लोगों के बीच गलतफहमी पर विस्तार में अपनी बात कही. यूथ लीडरशिप कॉन्क्लेव में मोहन भागवत ने कहा कि जब हम कहते हैं कि हम सब को हिंदू मानना है तो इसे लेकर हमारे मन में कोई भी संशय नहीं होता. किसी भी प्रकार का संशय हमारे मन में नहीं है क्योंकि किसी को भी, किसी भी पूजा से, किसी भी भाषा से, किसी भी प्रांत से, किसी भी रीती-रिवाजों से, किसी भी प्रकार के विचार से यहां तक की कोई नया विचार भी हो, अगर वो देश के विपरीत नहीं है, अपने समाज के विपरीत नहीं है, अपने मानव-धर्म के विपरीत नहीं है तो उन सबका विरोध करने का हमारा कोई विचार नहीं है. हम ये भी नहीं चाहते की आप ये सब छोड़कर हमारे जैसे बन जाओ क्योंकि हम जैसे बनने का कोई तरीका ही नहीं है.
अमेरिका-चीन के झगड़े में नहीं पड़ना
मोहन भागवत कहा कि हमको अमेरिका-चीन के स्वार्थ के झगड़े मे नही पड़ना. हमे US से भी काम से काम रखना है और CHINA से भी काम से काम रखना है और दोनो कुछ करे तो हमे प्रतिकार करना और सबको ठीक लाईन में चलाने वाले हम ही लोग हो.
हिन्दुत्व का असली मतलब क्या?
संघ प्रमुख भागवत ने अपनी बात को समझाते हुए आगे कहा, ‘केवल, उसको ये मानना चाहिए की मैं इस देश का हूं. ये सब मेरा है. ये सब मेरे देश का है और इस देश की जो संस्कृति की धारा है वो सबको साथ में लेकर चलने की है. मैं भी उसमें एक हूं. मैं उसका विरोधी नहीं हूं. मैं उसको नष्ट नहीं करंगा. मैं उसका समर्थन करूंगा. मैं उसकी रक्षा करुंगा. मैं उसका विकास करुंगा और मैं अपना भी विकास करंगा. मोहन भागवन ने कहा कि इस भाव से जब कोई रहता है, तो उसको क्या मानते हैं, हिंदू मानते हैं. तो इसलिए जब हम कहते हैं, “हिंदू राष्ट्र”, तो किसी को डरने की या किसी को अलग मानने की, कोई आवश्यकता नहीं. हमारा हिंदू धर्म ही ऐसा है.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें

