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इतनी हरियाली फिर भी रेड जोन में ग्रेटर नोएडा! बन गया दूसरा सबसे प्रदूषि‍त शहर! आखिर क्यों? एक्सपर्ट ने बताई वजह


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Air pollution in Greater-Noida: ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण का स्‍तर लगातार बढ़ता जा रहा है. यहां के अध‍िकांश इलाकों में एयर क्‍वाल‍िटी इंडेक्‍स 400 के दायरे को भी पार कर गया है और हवा च‍िंताजनक श्रेणी में पहुंच गई है. ऐसे में लोगों का सवाल है क‍ि बेहद हरे-भरे ग्रेटर नोएडा में इतना प्रदूषण आ कहां से रहा है? द‍िल्‍ली की तरह यह शहर भी गैस चैंबर क्‍यों बनता जा रहा है? आइए जानते हैं एक्‍सपर्ट की राय..

ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण का स्‍तर काफी ज्‍यादा बढ़ गया है, जबक‍ि यहां हर‍ियाली बहुत ज्‍यादा है, आइए जानते हैं क्‍यों?

Greater Noida Air Pollution: एनसीआर में सिर्फ दिल्ली की हवा ही दम नहीं घोंट रही है बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा भी प्रदूषण के मामले में जबर्दस्त टक्कर दे रहे हैं. हरे-भरे ग्रेटर नोएडा में भी एक्यूआई 400 को पार कर गया है. रेड जोन में पहुंचा ग्रेनो देश का दूसरा सबसे प्रदूष‍ित शहर बन गया है. यहां लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. सांसों में घुलता यह जहर अब डरा रहा है. ऐसे में लोगों का सवाल है कि हर तरफ हरियाली, खुली सड़कें और शांत वातावरण वाले ग्रेटर नोएडा में ग्रेडेड रैपिड एक्शन प्लान की तीसरी स्टेज की पाबंद‍ियां भी लागू कर दी गई हैं, इसके बावजूद इतना प्रदूषण आखिर क्यों है?

सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को ग्रेटर नोएडा का एक्‍यूआई 390 दर्ज क‍िया गया. जबक‍ि उत्‍तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि प‍िछले कुछ दिनों से ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क का इलाका सबसे ज्यादा प्रदषित है. यहां एक्यूआई 450 से ऊपर तक पहुंच गया है. सेक्टर 116 में एक्यूआई 401 तक हो गया है.वहीं नोएडा की भी अधिकांश जगहों पर हवा खराब से बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है.

ग्रेटर नोएडा में एक्‍यूआई 400 को पार कर गया है.
ग्रेटर नोएडा में बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, नई द‍िल्‍ली के वायु प्रदूषण विशेषज्ञ विवेक चट्टोपाध्याय कहते हैं कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बहुत सारी इंडस्ट्रीज हैं. इन शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा सीमित होने के चलते बड़ी संख्या में यहां लोग पर्सनल गाड़ियां रखते हैं. यहां बढ़ता कंस्ट्रक्शन भी एक वजह हो सकता है.इसके अलावा यहां प्रदूषण को बढ़ावा देने वाले कुछ स्थानीय कारण भी हो सकते हैं, जो देखने की जरूरत है लेकिन इन सभी से अलग एक पर्यावरणीय प्रभाव भी हो सकता है जो इसे प्रदूषित करने में सबसे बड़ा योगदान देता है.

ग्रेटर नोएडा दिल्ली-एनसीआर के डाउनविंड एरिया में आता है, लिहाजा जब भी हवा चलती है तो वह बहती हुई नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इलाकों में आती है. अगर दिल्ली में प्रदूषण है तो वहां का सारा प्रदूषण हवा के साथ बहता हुआ यहां आएगा ही और आगे फैलेगा. पराली का धुआं भी दिल्ली से होता हुआ इधर ही बढ़ता है. ऐसे में जब तक राजधानी में प्रदूषण रहेगा तो यहां भी हालात सुधरने वाले नहीं हैं.

द‍िल्‍ली का प्रदूषण हवा के साथ ग्रेटर नोएडा में आ जाता है.

विवेक कहते हैं कि जहां तक ग्रेटर नोएडा में हरियाली की बात है तो पेड़-पौधे पीएम 10 यानि बड़े पार्टिकुलेट मेटर या धूल को रोकने में जरूर मदद करते हैं लेकिन ऐसा प्रदूषण जिसमें धुआं, पीएम 2.5 और गैसों जैसे प्रदूषण तत्व शामिल होते हैं, उनको ये पेड़-पौधे नहीं रोक पाते. लिहाजा इतनी हरियाली होने के बावजूद भी प्रदूषण स्तर बढ़ता रहता है.

प्रदूषण पर कैसे लगे लगाम?
पूर्व मौसम विज्ञानी, भारतीय मौसम विभाग के जे रमेश कहते हैं कि एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम लगाने की जितनी भी कोशिशें अभी तक हुई हैं वे ग्राउंड पर बेहतर नहीं कर पाई हैं, फिर चाहे वे स्मॉग टॉवर्स हों या क्लाउड सीडिंग की कोशिश. अगर एनसीआर से प्रदूषण को हटाना है तो जमीनी स्तर पर काम करना होगा. जहां जहां से प्रदूषण का उत्सर्जन हो रहा है, हर उस जगह को चिह्नित करना होगा और उसे प्रतिबंधित करना होगा. गैसों से लेकर पार्टिकुलेट मेटर्स का उत्सर्जन कम ही नहीं हो रहा है, ऐसे में प्रदूषण को दूर करने के लिए कितने भी अस्थाई उपाय कर लिए जाएं, कोई फायदा नहीं होने वाला है. इससे निपटने के लिए ठोस रणनीति और सही कदम उठाना जरूरी है.

priya gautamSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्… और पढ़ें

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