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11 साल तक नहीं बने संबंध, पत्नी देती रही धमकी, कोर्ट से पति को राहत


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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक ऐसे वैवाहिक विवाद पर बड़ा फैसला दिया है, जिसमें पति-पत्नी 11 साल से अलग रह रहे थे. पति ने बताया कि हर बार शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश पर पत्नी आत्महत्या की धमकी देती थी. कोर्ट ने इसे पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना है. रायपुर की महिला और अंबिकापुर के व्यक्ति की शादी 2009 में हुई थी.

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छत्‍तीसगढ़ कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के 11 साल के अलगाव और रिश्‍ते में लगातार दूरी को मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक की डिक्री को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक संबंध न होना और वैवाहिक जीवन में लौटने से इनकार करना पति के लिए मानसिक यातना है. अंबिकापुर निवासी व्यक्ति और रायपुर की महिला की शादी वर्ष 2009 में हुई थी. पति का आरोप था कि पत्नी शादी के एक महीने बाद ही मायके चली गई थी. पति के प्रयासों के बावजूद वह वापस नहीं लौटी. कुछ समय बाद वह साथ रही, लेकिन शारीरिक संबंध बनाने से इंकार करती रही.

पति ने फैमिली कोर्ट में कहा कि पत्नी कई बार आत्महत्या की धमकी देती थी. पति के अनुसार, पत्नी ने स्पष्ट कहा था कि अगर उसने शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, तो वह जान दे देगी. पति ने कहा कि वह बार-बार प्रयास करता रहा. लेकिन पत्नी का व्यवहार नहीं बदला. पत्नी ने आरोपों से इंकार किया. पत्नी ने कहा कि पति साध्वी के भक्त हैं और योग साधना में लीन रहते थे. उसने कहा कि पति संतानों की इच्छा नहीं रखते थे. पत्नी ने पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए. पत्नी ने वैवाहिक अधिकार बहाली की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया.

पति-पत्नी 2014 से अलग रह रहे, पत्नी को 20 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता 
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के बयान और दस्तावेजों को देखा. कोर्ट ने पाया कि पति-पत्नी 2014 से अलग रह रहे हैं. पत्नी ने क्रॉस एग्जामिनेशन में स्वीकार किया कि वह अब पति के साथ रहना नहीं चाहती. कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय से अलग रहना अपने आप में मानसिक क्रूरता है. कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. पति को तलाक की डिक्री दे दी गई. साथ ही पति को दो महीने के भीतर पत्नी को 20 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया.

वैवाहिक जीवन में वापस आने से साफ इंकार करना, मानसिक क्रूरता 
कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंध विश्वास, निकटता और साथ रहने की इच्छा पर टिके रहते हैं. इतने लंबे समय तक दूरी इस रिश्ते को समाप्त कर देती है. हाई कोर्ट के इस फैसले को दंपती विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है. कोर्ट ने साफ कहा कि वैवाहिक जीवन में वापस आने से साफ इंकार करना, संबंध न बनाना और अलग रहना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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