Animal Husbandry Tips : गाय-भैंसों को खिला दें Free का ये ‘सुपर टॉनिक’… ठंड में बहेगी ‘दूध की नदियां’!


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Animal Husbandry Tips : सर्दियों में गाय-भैंसों का दूध उत्पादन अक्सर घट जाता है, लेकिन सरसों और बिनौला की खली उनके लिए एक फ्री का सुपर टॉनिक साबित होती है. यह प्राकृतिक आहार न सिर्फ पशुओं को गर्माहट देता है, बल्कि उनकी ताकत, पाचन शक्ति और दूध की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है.

सुल्तानपुर : सर्दियों के मौसम में दुधारू पशुओं की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि इस दौरान ठंड के कारण उनके दूध उत्पादन में सामान्यतः 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आ जाती है. ऐसे समय में सरसों की खली और बिनौला (कपास) की खली पशुओं के लिए एक बेहद प्रभावी और सस्ती पूरक आहार साबित होती है.पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह खली न सिर्फ पशुओं को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि उनके संपूर्ण स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाती है, जिससे दुग्ध उत्पादन में सुधार होता है।

सरसों और बिनौला की खली वास्तव में बीजों से तेल निकालने के बाद बचा ठोस अवशेष होती है, जिसमें पोषक तत्वों की भरमार होती है. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के डॉ. दिवाकर कुमार बताते हैं कि सरसों की खली में 35 से 40 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है. वहीं बिनौला की खली भी प्रोटीन, वसा और ऊर्जा का बड़ा स्रोत मानी जाती है. इसके अलावा, इनमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और कई आवश्यक खनिज शामिल होते हैं, जो पशुओं की हड्डियों, मांसपेशियों और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखते हैं. यही कारण है कि सर्दियों में इनका सेवन पशुओं को बेहतर पोषण देने के साथ-साथ ठंड से बचाव भी करता है.

दूध होगा गाढ़ा और पौष्टिक
खली खिलाने का सबसे बड़ा फायदा दूध उत्पादन पर पड़ता है. नियमित और संतुलित मात्रा में खली खाने वाले दुधारू पशुओं के दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि देखी जाती है. खली में मौजूद प्रोटीन और खनिज दूध में वसा और ठोस पदार्थों की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे दूध अधिक गाढ़ा और पौष्टिक बनता है. यही वजह है कि डेयरी उद्योग से जुड़े किसान खली को पशु आहार में अनिवार्य मानते हैं.

सर्दियों का प्राकृतिक टॉनिक
पाचन के मामले में भी सरसों की खली बेहद उपयोगी है, क्योंकि यह आसानी से पच जाती है और पशुओं के पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है. इसके सेवन से पशु ऊर्जावान रहते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है, जिससे वे सर्दी में होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे सर्दियों का एक प्राकृतिक टॉनिक माना जाता है, क्योंकि यह कम खर्च में अधिक लाभ देने वाली आहार सामग्री है.

mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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गाय-भैंसों को खिला दें Free का ये ‘सुपर टॉनिक’, ठंड में बहेगी दूध की नदियां



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