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Russia Ukraine War Update | Zelensky on US Ultimatum- अमेरिका के अल्टीमेटम पर खूब दहाड़े जेलेंस्की, बोले- कैसे खो दूं आत्मसम्मान, शांति डील पर मिला धोखा?


नई दिल्ली: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका की ओर से थोपे गए “एक हफ्ते के अल्टीमेटम” को लेकर देश को संबोधित करते हुए कड़ा संदेश दिया है. अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन रूस के साथ एक US-ब्रोकर शांति समझौते के “फ्रेमवर्क” को अगले सप्ताह तक मंजूरी दे. वरना वॉशिंगटन सैन्य व खुफिया सहायता में कटौती कर सकता है. जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन या तो आत्मसम्मान खो देगा या अपना सबसे अहम साझेदार”. लेकिन वह किसी भी कीमत पर राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं करेंगे.

उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले कुछ दिन यूक्रेन के लिए बेहद कठिन हो सकते हैं क्योंकि अमेरिका का दबाव तेज हो गया है. द गार्जियन के अनुसार, जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि “शांति डील की मौजूदा शर्तें यूक्रेन को कमजोर स्थिति में धकेल सकती हैं और ऐसा स्वीकार करना आत्मसम्मान का नुकसान होगा.”

US के प्रस्ताव पर यूक्रेन की दो टूक

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने बिल्कुल साफ कह दिया है कि यूक्रेन को शांति प्रस्ताव की बुनियादी रूपरेखा पर सहमत होना ही होगा. वहीं जेलेंस्की का कहना है कि मैं अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हूं. लेकिन यूक्रेन की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा कि रूस को यह दावा करने का मौका नहीं दिया जाएगा कि “यूक्रेन ही शांति नहीं चाहता.”

जेलेंस्की ने इसे आत्मसम्मान के खिलाफ बताया.

जेलेंस्की की रणनीति: मैं तर्क दूंगा, विकल्प दूंगा, समझाऊंगा

जेलेंस्की ने कहा कि वह अमेरिकी नेतृत्व के साथ बातचीत में प्रस्ताव में संशोधन की मांग रखेंगे. उन्होंने दो टूक कहा, “मैं तर्क दूंगा, मनाऊंगा और विकल्प पेश करूंगा. 2022 में हमने यूक्रेन को नहीं झुकने दिया था, अब भी नहीं झुकने देंगे.”

यूक्रेन को कमजोर मत करो: यूरोप का रुख भी स्पष्ट

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ और यूक्रेन दोनों ने अमेरिकी प्रस्ताव के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को खारिज कर दिया है. जर्मनी के मेर्ज, फ्रांस के मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने जेलेंस्की के साथ सहमति जताई कि यूक्रेन की सेना की संख्या में कोई कटौती नहीं की जानी चाहिए. यूरोपीय नेताओं ने यह भी कहा कि किसी भी क्षेत्रीय बातचीत का आधार केवल “वर्तमान फ्रंटलाइन” ही होगी.
इसी बैठक में यूक्रेन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने यूरोप और यूक्रेन के दीर्घकालिक हितों की सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयास करने पर सहमति जताई. यानी साफ संदेश कि यूरोप यूक्रेन को किसी कमजोर समझौते के लिए मजबूर करने के पक्ष में नहीं है.
जेलेंस्की ने कहा, “हम अपने भविष्य से समझौता नहीं करेंगे, चाहे कीमत कुछ भी हो.”(फोटो Reuters)

अमेरिका का दबाव क्यों बढ़ा?

विश्लेषकों के मुताबिक वॉशिंगटन की जल्दी के पीछे कई कारण हैं-

  • युद्ध लगातार लंबा खिंच रहा है.
  • पश्चिमी देशों की थकान बढ़ रही है.
  • कई हिस्सों में यूक्रेन की सैन्य स्थिति कमजोर हुई है.
  • अमेरिकी घरेलू राजनीति भी अब खुली मदद देने के खिलाफ जा रही है.

जेलेंस्की- जेडी वेंस कॉल तनावपूर्ण

न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार जेलेंस्की ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत की. हालांकि बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन रिपोर्टें कहती हैं कि माहौल “तनावपूर्ण और निर्णायक” था.

जेलेंस्की ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत की. (फोटो Reuters)

US प्रस्ताव क्या है?

प्वाइंट विवरण
मौजूदा नियंत्रण रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को बातचीत का आधार मानने का दबाव
युद्धविराम सीमाओं को “जैसा है वैसा” मानकर युद्ध रोकने की मांग
राजनीतिक ढांचा आगे की सुरक्षा व राजनीतिक चर्चा का प्रस्ताव
पश्चिमी गारंटी अमेरिका–यूरोप की भूमिका तय
समय सीमा एक सप्ताह में प्रतिक्रिया की मांग

यूक्रेन के सामने संभावित रास्ते

  1. प्रस्ताव स्वीकार करना: पर इससे आत्मसम्मान व भू-भाग प्रभावित हो सकता है.
  2. प्रस्ताव ठुकराना: इससे US सहायता खतरे में पड़ सकती है.
  3. संशोधित शर्तों पर सहमति: जेलेंस्की इसी को आगे बढ़ा रहे हैं.
  4. यूरोपीय समर्थन बढ़ाना: ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम हो.

क्या टूट सकती है US–यूक्रेन की साझेदारी?

यूक्रेन अब तक जिस मजबूती से खड़ा रहा, उसका बड़ा आधार अमेरिका था. लेकिन “वन-वीक डेडलाइन” ने दोनों के बीच तनाव साफ कर दिया है. जेलेंस्की ने कहा, “हम अपने भविष्य से समझौता नहीं करेंगे, चाहे कीमत कुछ भी हो.”



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