कानपुर: डॉक्टर शाहीन से लेकर डॉ. आरिफ तक का दिल्ली कार ब्लास्ट से कनेक्शन सामने आया है. व्हाइट कॉलर टेरर का भंडाफोड़ होने से शहर में सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं. इसी कड़ी में, अब कानपुर पुलिस और एंटी-इंटेलिजेंस यूनिट ने बड़ा फैसला लिया. संयुक्त टीम ने शिक्षण संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे कश्मीर के छात्रों, डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों का सत्यापन करने का निर्णय लिया है. इन्होंने ये प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ सुरक्षा को मजबूत करने और सभी संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए की जा रही है.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), निजी मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य प्रोफेशनल संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि कश्मीर से आए छात्रों और शिक्षकों की पूरी जानकारी 7 दिन के भीतर उपलब्ध कराएं. इसमें उनका स्थायी पता, परिवार की जानकारी, एडमिशन किस वर्ष हुआ, किस विभाग में पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं, हॉस्टल में रहते हैं या बाहर, जैसी सभी जानकारियां शामिल हैं.
कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि वे पहले से ही अपने रिकॉर्ड अपडेट रखते हैं और किसी भी प्रकार की सुरक्षा जांच में वे हमेशा तैयार रहते हैं. छात्रों में भी इस कार्रवाई को लेकर किसी प्रकार की घबराहट नहीं है. कई छात्रों ने कहा कि यदि इससे सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती है तो यह कदम बिल्कुल सही है. उन्होंने बताया कि वे अपनी पहचान और दस्तावेज पहले भी कॉलेज में जमा कर चुके हैं और अब आवश्यकता पड़ने पर फिर से देने में कोई परेशानी नहीं है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया अगले एक हफ्ते के भीतर पूरी कर ली जाएगी. सभी संस्थानों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और कई जगहों से रिपोर्ट भी मिलनी शुरू हो गई है. सुरक्षा एजेंसियां हर रिपोर्ट को ध्यान से जांच रही हैं, ताकि शहर में पूरी तरह शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. कुल मिलाकर, दिल्ली की घटना के बाद कानपुर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है. प्रशासन का दावा है कि यह सिर्फ एक एहतियाती कदम है, ताकि किसी भी तरह की संभावित समस्या को समय से रोका जा सके.